दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना खतरनाक, स्मोकिंग न करने वालों को भी फेफड़े की गंभीर बीमारी

Wednesday, 20 November 2019

/ by BodoNews


अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, धूम्रपान नहीं करते हैं, पहले कभी सांस संबंधी बीमारी भी नहीं रही है और आप खुद को फिट और हेल्दी बनाए रखने के लिए सुबह-सुबह दौड़ भी लगाते हैं तो अब आपको सतर्क होने की जरूरत है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आपके आसपास मौजूद वायु प्रदूषण की वजह से हवा इतनी जहरीली हो गई है कि यह औसतन हर दिन 15 से 20 सिगरेट पीने के बराबर है। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ चुका है कि इंसान के स्वस्थ फेफड़ों में खतरनाक बीमारी होने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
खतरनाक नहीं अब संकट बन चुका है वायु प्रदूषण
दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. राजेश चावला ने कहा, ‘दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण सिर्फ स्वास्थ्य के लिए खतरनाक नहीं रहा है। यह अब संकट बन गया है। दिल्ली में हर कोई इससे प्रभावित है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप धूम्रपान करते हैं या नहीं, यहां हर कोई समान रूप से 15 से 20 सिगरेट रोजाना पी रहा है। अगर यह जारी रहा तो भविष्य में नवजात शिशुओं में जन्म के समय भी सांस संबंधित समस्या पाई जाएगी।’
स्थायी रूप से बीमार हो रहा है लोगों का फेफड़ा
उत्तर भारतीय राज्यों में पिछले एक महीने से गंभीर वायु प्रदूषण है, और वायु गुणवत्ता सूचकांक आपात स्तर पर पहुंच गया है। मुंबई स्थित डॉ. एलएच हीरानंदानी हॉस्पिटल के कंसल्टेंट (पल्मोनोलॉजी) डॉ. स्वप्निल मेहता के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 100 से ज्यादा हानिकारक होता है। मेहता ने कहा, ‘दिल्ली में 300-400 की एक्यूआई है, जो सभी के लिए खतरनाक है। यहां तक कि प्रत्येक स्वस्थ फेफड़ा बीमार हो रहा है, और वह भी स्थायी रूप से। इससे फेफड़े आगे वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के लिहाज से अधिक कमजोर हो रहे हैं, और जीवन प्रत्याशा कम हो रही है और मृत्यु दर बढ़ रही है।’
नॉन स्मोकर्स को भी हो रही सीओपीडी की बीमारी
फॉर्टिस हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ विवेक नांगिया कहते हैं, फेफड़ों की गंभीर बीमारी सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज अब धूम्रपान न करने वालों में भी बेहद आम हो गई है। पिछले 2-3 सालों में मैंने ऐसे कई केस देखे हैं। स्मोकिंग न करने वालों को भी सीओपीडी होने की सबसे बड़ी वजह लंबे समय तक हाई लेवल आउटडोर पलूशन में रहना है। WHO की मानें तो सीओपीडी ऐसी बीमारी है जो एक बार हो जाए फिर पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकती। इसका सिर्फ इलाज हो सकता है।
सेकेंड हैंड स्मोक, प्रदूषण सब मिलकर फेफड़ों को कर रहे बीमार
आरएमएल हॉस्पिटल के वरिष्ठ चेस्ट फिजीशियन डॉ. देश दीपक ने कहा, ‘धूम्रपान नहीं करने वालों को भी खतरा है। धूम्रपान नहीं करने पर वायु प्रदूषण ही बीमारी बढ़ाने के लिए जरूरी तत्व उपलब्ध करा सकता है। धूम्रपान, सेकेंड हैंड स्मोक (एसएचएस) और प्रदूषण के एक साथ हमले से आपके फेफड़े बीमार पड़ सकते हैं।

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